बुधवार, 5 अप्रैल 2017

हमारा वतन है, तुम्हारा वतन है




हमारा वतन है, तुम्हारा वतन है
हमारा वतन है, तुम्हारा वतन है

ये सबका वतन है ये प्यारा वतन है
जहां रंग ओ बू का लुटा है खज़ाना 
यही वो चमन है यही वो चमन है
हरेक शाम जिस की बड़ी है सुहानी 
हरेक सुब्ह: जिस की बड़ी पुरअमन है 
किसी को किसी से नही है शिकायत 
हरेक अपनी धुन में यहां पर मगन है
न बुग्ज़ ओ अदावत, हिकारत न नफ़रत 
मुहब्बत का हर सू यहाँ पर चलन है 
मगर नफ़रतों का है व्यापार जिनका 
उन्हें इस अमन से बड़ी ही जलन है 
संभल कर है चलना सभी को यक़ीनन 
नया दौर अकमल बड़ा पुरफितन है 
अकमल नईम अकमल

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شاعر

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