जिसे हो अपनी ही परवाह वो जहनियत क्या है
जिसे हो अपनी ही परवाह वो जहनियत क्या है
न आये काम किसी के वो शख्सियत क्या है
मताए जीस्त तो आमाल के सिवा कुछ भी नहीं
मुझे पता है की दुनिया की असलियत क्या है
जमाने वालों की परवाह नहीं मुझे अकमल
मेरी नजर में जमाने की हैसियत क्या है
अकमल नईम अकमल
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