रविवार, 2 सितंबर 2018

अकमल


अकमल 07/01/2018
बाक़ी सब कुछ मुहमल मुहमल
इक तेरी ही ज़ात है अकमल
इश्क,मुहब्बत,चाहत, उल्फत
फंस जाओगे ये है दलदल
तेरा जाना और ये आंखें
हर सु जैसे जलथल जलथल
तन को ढकना है बस मकसद
सूती कपडा हो या मख़मल
सुन कर तेरे जलवे जानां
दिल में हुई है हलचल हलचल
निस्बत जिसकी तुमसे होगी
हो जाएगा अफजल अफजल
तेरा चर्चा तेरी बातें
धड़कन धड़कन पलपल पलपल
जब से उसने सीखी उर्दू
वो लगता है अकमल अकमल



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