रविवार, 2 सितंबर 2018

विदाई गीत


धनराज नागल (लैब असिस्टेंट रिटायरमेंट विदाई गीत 31 जुलाई 2018 गांधी स्कूल)
विदाई

कह रहीं हैं दुख में डूबी ये फ़िज़ायें अलविदा
कह रही हैं आज पुरनम ये हवायें अलविदा

ये दरो दीवार कमरे हाल और ये रास्ते
कह रहे हैं किस तरह तुमको भुलायें अलविदा

देख लो तुमसे मुहब्बत करते हैं सब किस कदर
साथ ले जाओ हमारी तुम दुआयें अलविदा

ज़िन्दगी में ग़म न आयें अब तुम्हारी फ़िर कभी
और तकलीफ़ें न तुमको आज़मायें अल्विदा

याद रखेंगे तुम्हें हम याद रखना तुम हमें
ये तो मुमकिन ही नहीं है भूल जायें अलविदा

ज़िन्दगी गुलज़ार हो अब और बस हो शादमां
कर रहे हैं रब से हम ये इल्तिजायें अलविदा

आज आना आके जाना ज़िन्दगी का है चलन
काम ऐसे हम करें कि याद आयें अलविदा

है बड़ा मुश्किल जहां में दिल को समझाना मगर
फ़िर भी समझायेंगे इसको आप जायें अलविदा

है जुदाई भी बड़ी तकलीफ़कुन अकमल मगर
आज इसको भी चलो हम आज़मायें अलविदा




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