आ निगाहों से गुफ्तुगू कर लें
लफ्ज़ सारे सुने सुनाये हैं
आप कैसे हो ? ठीक हूँ साहब
सारे जुमले रटे रटाये हैं
किस लिए फिर संवर रहे हैं वो
वो जो अज़ख़ुद सजे सजाये हैं
जेवरों की तरह संभाले हैं
जितने ख़त वत लिखे लिखाए हैं
आसमां उसकी ओढ़नी में भी
चाँद तारे जड़े जड़ाये हैं
अहमरीं लब को देख शरमाये
फूल जितने खिले खिलाये हैं
आप क्या मुस्कुरा दिए अकमल
दिल में अरमान मुस्कुराए हैं
अकमल
01/05/2019
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