परमवीर अब्दुल हमीद
था धर्म ज़ात से बाला
इक नौजवान मतवाला
हां हमीद नाम है उसका
वो मुल्क का था रखवाला
थी जंग वही पैंसठ की
जो थी एक ज़िद और हठ की
इसी जंग का था वो सिपाही
और नाम कमाने वाला
छक्के यूं छुड़ाये उसने
छ: टैंक उड़ाये उसने
जो काम सै़कड़ों का था
वो तन्हा ही कर डाला
इस देश की ख़ातिर उसने
संकोच किया न एक पल
जब जामे शहादत पाया
हंसते हंसते पी डाला
करते हैं नमन हम उसको
ये श्रद्वा सुमन हम उसको
वो प्रेरणा है हम सबकी
वो राह दिखाने वाला
हर जीत उसी को समर्पित
ये गीत उसी को समर्पित
जो देश के हर दुश्मन को
हो धूल चटाने वाला
अकमल
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