बुधवार, 2 जून 2021

परिवर्तन

 

 

परिवर्तन

एक ज़माना था जब टीवी पर एकता कपूर के सोप ऑपेराज़ की धूम हुआ करती थी हिन्दुस्तान की लडकियां और औरतें इन सीरियल्स के किरदारों के साथ हंसती थीं और रोती थीं मुझे आज भी याद है जब एक सीरियल में मिस्टर बजाज नाम का किरदार जब मर जाता है तो मेरे मोहल्ले की तमाम गलियाँ सूनी हो गईं थीं ऐसा लगता था कि मोहल्ले के किसी बहुत ही रसूखदार आदमी की मौत हो गई हो ।

मुझे नहीं पता लोगों को इन सीरियल्स में क्या मज़ा आता था । मुझे तो ये सारे सीरियल्स वाहियात लगते थे क्योंकि ये सब अतार्किकता और अतिरेक से लबरेज़ थे । आपको भी शायद याद होगा शूम.......शूम........शूम........... और जू..............जू,,,,,,,,,,,,,,, करके एक ही सीन में, एक ही डायलाग पर कैमरे की रेंज में खड़े सारे पात्रों के चहरे और उनके अजीब अजीब से हाव भाव बार बार दिखाए जाते थे । यक़ीनन ये सब ओपेरा को लंबा खींचने के लिए किया जाता था । यहाँ तक तो पचाया जा सकता था मगर एक क़दम आगे बढ़ कर बल्कि मैं तो कहूँगा कई क़दम आगे बढ़ कर, ये सीरियल्स ऎसी ऎसी घटनाएँ दिखाया करते थे कि कभी कभी ज्ञान विज्ञान और अपने सामान्य ज्ञान पर भी शक होने लगता था । मिसाल के तौर पर सीरियल का कोई भी पात्र अचानक मर जाता था लेकिन कुछ समय बाद वो कुछ स्पष्टीकरण या किसी दलील के साथ ज़िंदा हो जाया करता था दलील भी ऎसी कि जिसको सुनकर हँसी निकल जाए, कभी भी किसी पात्र की शक्ल प्लास्टिक सर्जरी से एक झटके में ऎसी बदल दी जाती थी कि कल तक जो व्यक्ति आमिर खान जैसी शक्ल वाला नज़र आता था वो आज अचानक शाहरुख खान जैसा नज़र आने लगता था । मुझे लगता है अगर किसी यूरोपियन मुल्क के किसी डाक्टर या प्लास्टिक सर्जन ने इनमें से कोई सीरियल देखा होगा तो ज़रूर भारत के इन प्लास्टिक सर्जनों से  मिलने और इनसे ट्रेनिंग लेने की सोची होगी इसी तरह इन सीरियल्स के सारे पुरुष पात्र दब्बू, डरपोक और औरतों के हाथों की कठपुतली हुआ करते थे, उनमें ना तो रत्ती भर अक्ल थी ना समझ । और महिला पात्रों की बात तो क्या करें उनके सामने तो दाउद इब्राहीम और छोटा राजन भी पानी भरते थे ।

बहरहाल मैं आपको बता रहा था कि उन दिनों जब मैं अपनी श्रीमती जी से थोड़ी देर ख़बरें देखने की रिक्वेस्ट करते हुए रिमोट मांग लेता था तो ग़ज़ब ही हो जाता था मेरी जीवन संगिनी अपनी लाल लाल अंगारा आँखों के साथ मेरी ओर ऐसे देखा करती थीं मानो अभी मुझे जलाकर भस्म ही कर डालेंगी । लेकिन फिर भी वो मुझसे बहुत प्रेम करती थीं इसलिए ये कहते हुए कि “पता नहीं क्या हर वक़्त ख़बरें, समाचार, खबरें, समाचार करते रहते हैं लो पकड़ो देखो समाचार ! तुम्हारी कोई ख़बर नहीं आने वाली समाचार में................... सुबह पढ़ तो लेते हो अख़बार................ और क्यामालूम करना चाहते हो तुम दुनिया के बारे में ? क्या मालूम कैसे झेलते हो तुम ? बोर नहीं होते तुम समाचार देखकर ? ..................” सिर्फ़ ये ही नहीं इसी तरह की बहुत सी सलावातें सुनाने के बाद गुस्से दमकते हुए चेहरे और दहकती हुई आँखों से मुझे घूरते हुए रिमोट को मेरी ओर उछाल देती थीं । मैं इस मामले में थोड़ा प्रेक्टिकल हूँ । दिमाग़ में कोई गलत फहमी नहीं रखता इसलिए श्रीमती जी से बहस करने के बजाय ख़ामोशी के साथ रिमोट कैच करके समाचार देखना शुरू कर देता था । और वैसे भी उन दिनों मात्र 1 घंटे के ही समाचार आते थे और इतने समय में देश और पूरी दुनिया का सारा हाल दिखा जाया करते थे । आजकल की तरह 24 घंटे की चिल्ल पौ उस दौर में नहीं थी । खैर श्रीमती जी रिमोट उछालकर फुंफकारती हुई कमरे से निकला जाया करती थीं और हम शान्ति से समाचारों की दुनिया में लीन हो जाया करते थे ।

            अब मैं आपको फ्लैश बैक से वापिस वर्त्तमान में लाता हूँ । आज स्थिति उल्टी हो गई है अब श्रीमती जी जब फुरसत मिले तब समाचार चैनल लगाकर टीवी के सामने बैठी रहतीं हैं । अब उन्हें एकता कपूर के डेली सोप वाला आनंद इन समाचार चैनलों पर आने लगा है । ब्रेकिंग न्यूज़, हम तो पूछेंगे, इनसे पूछेंगे, उनसे पूछेंगे, हिन्दुस्तान पूछता है, जवाब देना होगा, उनकी अदालत, सच क्या है, पोल खोल दूँगा, जिहादी कौन, राष्ट्रवादी कौन, गरमा गरम बहस, आग लगा देंगे, बर्फ जमा देंगे, कान फाड़ देंगे, होश उड़ा देंगे, अक्ल ठिकाने लगा देंगे ......वगैरह वगैरह । ये सब प्रोग्राम एकता कपूर के डेली सोप का एक्सटेंडेड वर्शन बन गए हैं जो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन ही नहीं करते बल्कि अपने खुफिया एजेंडे की परवरिश भी कर रहे होते हैं । खैर हमारी स्थिति अब भी वही है, मैं अब भी रिमोट मांगता हूँ  मगर परिवर्तन इतना हुआ है कि अब श्रीमती जी को ख़बरों के चैनल देखने का शौक हो चला है (जिनमें ख़बरें कहीं नहीं होंती लेकिन सीरियल्स वाला मसाला और रोमांच भरपूर होता है) और मैं थोड़ी देर के लिए कोई हल्का फुल्का सीरियल या कॉमेडी शो देखने के लिए रिमोट मांगता हूँ । श्रीमती जी का वही रिएक्शन अब भी आता है और मैं अब भी प्रतिकार नहीं करता । वो अब भी रिमोट मेरी गोद में फैंक दिया करती हैं लेकिन ये कहते हुये “पता नहीं आजकल क्या टीवी सीरियल का नशा चढ़ गया है ? पहले समाचार समाचार करते थे अब ना खुद देखते हैं ना मुझे देखने देते हैं .................... अब क्यूँ नहीं देखते समाचार ......... अब टीवी सीरियल क्यूँ अच्छे लगने लगे हैं ? पहले तो दुनिया भर की चिढ़ थी सीरियल्स से........... ? अब क्या हुआ........ ?” मगर मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि मैं इस मामले में थोड़ा प्रेक्टिकल हूँ । दिमाग़ मैं अब भी कोई ग़लतफहमी नहीं रखता हूँ इसलिए चुप रहता हूँ । अब मैं श्रीमती जी से क्या कहूँ कि समाचार अब सीरियल की तरह हो गए हैं इसलिए मैं इन्हें देखकर क्या करूं ? इनमें खबरें कहाँ हैं ? इनमे नफ़रत है, लड़ाई है, साजिशें हैं, झूठ है ......... और ये सीरियल्स की तरह अतार्किकता, अवैज्ञानिकता और जिहालत से भरे हुए हैं । बहस के नाम पर टीवी एंकर मुर्गा लड़ाने वालों की तरह तथाकथित नेताओं, धर्म के ठेकेदारों और राष्ट्रवादियों को लड़ाता रहता है और जनता आनंदित होती रहती है । झूठे वीडियो क्लिप्स दिखाए जाते हैं, झूठी मनगढ़ंत बातें दिखाई जाती हैं जिन सबका एक ही उद्देश्य है सनसनी पैदा करना । जी हाँ ! सनसनी ! क्या हुआ कुछ याद आ गया क्या ? नहीं ! चलो खैर ! मैं कहा रहा था कि इन न्यूज़ चैनल्स यानि मीडिया हाउसेज़ का एक ही मूल मन्त्र है सनसनी पैदा करना । सनसनी टीआरपी लाती है और यही टीआरपी धन बरसाती है । और असल देशभक्ति, असल राष्ट्रवाद इसी धन में छिपा है ।            

غزل

 بدنام مجھ کو کرنے دشمن یہ سب وطن کے   

کچھ لوگ تیرتے ہیں گنگا میں لاش بن کے

سازش میں تھے جو شامل اور تھے خزاں کے حامی

اب منتظم ہوئے.ہیں وہ ہی میرے چمن کے

تم نے ہوا کی شہہ پر سب راکھ میں ملایا

تم سب چراغ تو تھے میری ہی انجمن کے

تشہیر کر رہے ہیں نفرت کی وہ جمن میں

کہتے تھے خود کو حامی اور داعی جو امن کے

پیار اور الفتوں کے گاتے تھے جو ترانے

جانے کہاں گئے وہ پنچھی میرے صحن کے

تو بھیج دے خدایا ابر بہار اب تو

گزریں گے دن یہ کیسے مولا بھری گھٹن کے

چارہ گروں سے کہہ دو آ جائیں اب خدارا

زخموں سے چور اکمل اعضاء ہیں سب بدن کے


شاعر

  شاعر بے چارہ حب جاہ کامارا ہوتا ہے۔واہ  !   واہ  !   کے کلمات اس کے لئے ویسے ہی کام کرتے ہیں جیسے وینٹی لیٹر پر پڑے مریض کے لئے آکسیجن ...