मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

स्वदेशी दीपावली

स्वदेशी दीपावली

राष्ट्रहित का गला घोंट कर
छेद  न करना थाली में   
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में

देश के धन को देश में रखना
नहीं बहाना नाली में
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में

बने जो अपनी मिट्टी से वो
दिए बिके बाजारों में
सभी के घर में खुशियां आयें
ऐसे तीज त्यौहारों में
ना अपने भारतवासी अब
जियेंगे यूं बदहाली में
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में

ऊंच नीच का भेद मिटाकर
समता भाव जगाना है
हमको अपने तन मन धन से
देश को आगे बढ़ाना है
देश को अपने ले जायेंगे
हम दौरे खुशहाली में
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में

चीन के दीपक घटिया हैं और
देश के हित में घातक हैं
पर्यावरण को नष्ट करेंगे
ये विनाश के धोतक हैं
जहर घोलने से बचना है
हमको इस हरियाली में
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में

स्वदेशी दीपक में अपने  
देश की सौंधी मिट्टी है
राम लक्ष्मण और सीता के
कदमों वाली मिट्टी है
कम कीमत और चमक दमक है
पर श्रध्दा से खाली हैं
मिट्टी वाले दिए जलाना
अब की बार दीवाली में


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شاعر

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