सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

करण्ट वाली (स्त्री) इस्तरी

करण्ट वाली (स्त्री) इस्तरी

सुबह का वक्त है
ताऊ अख़बार पढ रहा था
और पास में ही
आग पर चाय का भगोना चढ रहा है
इतने में पडोस का छोरा आया
और ताऊ से बोला , सुन ताया  !
मुझे तेरी इस्तरी चाहिये
ये सुनकर ताऊ ने छोरे से कहा
ले जा म्हारी स्त्री वा बैठी, वहां
लडके ने ताई की तरफ़ देखा और
शरमा कर बोला
अरे ताऊ या वाली नहीं
मुझे तो वो चाहिये जो गरम होवे है  !
ताऊ ने बिना नज़रे उठाये फ़िर कहा
“हां हां ! ले जा आ बहुत गरम होवे है “
छोरा फ़िर धरम संकट में फंसा
थोडा सा मुस्काया फ़िर हंसा
और फ़िर सर खुजाते हुये बोला
“ताऊ मुझे तो कपडे वाली इस्तरी चाहिये”
ताऊ की नज़रे अब भी अख़बार से न हटीं
जिस में लिखा था ट्रेन से आज दो बकरियां कटीं
ताऊ ने फ़िर ताई की तरफ़ इशारा किया  
और गम्भीर मुद्रा में ही कहा
“हां हां कपडे वाली ही है !”
“तुझे क्या ये बिना कपडों के नज़र आती है ?
“जा ले जा अगर ये साथ जाती जाती है”
छोरे ने फ़िर कहा, सर को खुजाते हुये
थोडा ज़ोर से और कुछ खिसियाते हुये
अरे ताऊ करण्ट वाली, करण्ट वाली !
करण्ट वाली इस्तरी
ताऊ ने अख़बार से नज़रों को हटाया
छोरे को इशारे से पास बुलाया
और मुस्कुराते हुये यूं फ़रमाया
“हां बेटा यही है, करण्ट वाली इस्तरी
तू एक बार ले जा के देख !
इस का करण्ट बहुत ही तगडा है
इसी बात का तो सब झगडा है


02/10/17

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شاعر

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